Gilgit Baltistan History: भारत के गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान ने कैसे किया अवैध कब्जा, 70 साल पुरानी कहानी जानें

इस्लामाबाद: पाकिस्तान कर्ज का बोझ कम करने के लिए भारत के गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को लीज पर सौंपने की तैयारी कर रहा है। गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के अभिन्न अंग जम्मू और कश्मीर का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने आज से 70 साल पहले धोखे से कब्जा कर लिया था। काराकोरम नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष मुमताज नागरी ने आशंका जताई है कि पहले से अलग-थलग और उपेक्षित गिलगित-बाल्टिस्तान वैश्विक शक्तियों से लिए भविष्य में युद्ध का मैदान बन सकता है। उन्होंने स्थानीय लोगों से पाकिस्तान के इस फैसले के खिलाफ लड़ने की आवाज उठाई है। दावा किया जा रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को सौंपने से पाकिस्तान को मोटी रकम मिल सकती है। इससे वह अपनी आर्थिक बदहाली को दूर सकता है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का दावा है कि वर्तमान में भारत की मजबूत स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के लिए ऐसा करना लगभग असंभव है।

गिलगित-बाल्टिस्तान के बारे में जानें
गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन यह आजादी के बाद से पाकिस्तान के कब्जे में है। यह क्षेत्र उपेक्षित, अलग-थलग और लगभग अविकसित है। पाकिस्तानी संविधान में भी इस हिस्से को राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के संविधान में भी इस हिस्से को शामिल नहीं किया गया है। पिछले साल इमरान खान सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत बनाने के लिए खूब हाथ पैर मारा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। गिलगित-बालतिस्तान की राजधानी गिलगित है। गिलगित-बाल्टिस्तान 7 जिलों में बंटा हुआ है। इनमें गान्चे, स्कर्दू, गिलगित, दिआमेर, गिजर, अस्तोर और हुंजा नगर शामिल हैं।

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पाकिस्तान के कब्जे में कैसे गया गिलगित-बाल्टिस्तान
1947 में भारत की आजादी से पहले गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। लेकिन, 1935 में अंग्रेजों ने पूरे गिलगित-बाल्टिस्तान को कश्मीर के महाराजा से 60 साल की लीज पर ले रखा था। यह इलाका काफी ऊंचाई पर स्थित है, ऐसे में उस समय पूरे गिलगित-बाल्टिस्तान की रक्षा के लिए अंग्रेजों ने गिलगित स्काउट्स नाम की सैन्य टुकड़ी को तैनात किया था। जब भारत आजाद हुआ तो अंग्रेजों ने इस लीज को एक अगस्त 1947 को रद्द करके क्षेत्र को जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को लौटा दिया। तब जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने ब्रिगेडियर घंसार सिंह को गिलगित-बाल्टिस्तान का गवर्नर बनाया।

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गिलगित-बाल्टिस्तान की सेना ने विद्रोह कर पाक से मिलाया हाथ
गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को स्वीकार नहीं किया। उसने अंग्रेज सैन्य अधिकारियों और अपने विश्वासपात्रों के साथ मिलकर गिलगित-बाल्टिस्तान के गवर्नर घंसार सिंह को जेल में डाल दिया। इतना ही नहीं, उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान में मिलाने का समझौता भी कर लिया। 2 नवंबर 1947 को विद्रोह के फलस्वरूप गिलगित में पाकिस्तानी झंडा फहरा दिया गया। पाकिस्तान ने तुरंत मोहम्मद आलम नाम के शख्स को यहां का सदर नियुक्त कर दिया।

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पीओके से भी जुड़ा है गिलगित-बाल्टिस्तान का कनेक्शन
इस बीच जम्मू-कश्मीर पर कबायलियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर दिया। पाकिस्तानी फौज ने पुंछ, नौसेरा के कई इलाकों पर अपना कब्जा जमा लिया। जब राजा हरि सिंह ने भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर मदद की गुहार लगाई, तब भारतीय सेना ने कार्रवाई शुरू की। इससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने लगे। लेकिन इस मामले के संयुक्त राष्ट्र में चले जाने के कारण दोनों पक्षों ने युद्धविराम का ऐलान कर दिया। इस कारण जिस हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा बना रहा वो आज पाक अधिकृत कश्मीर के नाम से जाना जाता है।

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1949 में पाकिस्तान ने अलग प्रशासनिक इकाई बनाया
पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर में दिखावे के लिए एक मुखौटा सरकार का गठन किया। 28 अप्रैल 1949 को पीओके की मुखौटा सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान को सौंप दिया। जिसके बाद 1970 को पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को अलग प्रशासनिक इकाई का दर्जा दे दिया और इसका नाम नॉर्दन एरिया रखा गया। लेकिन, 2007 में इसका नाम दोबारा बदलकर गिलगित-बाल्टिस्तान कर दिया गया। 2009 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक आदेश जारी कर गिलगित बाल्टिस्तान में एक विधानसभा बनाने और गिलगित-बाल्टिस्तान काउंसिल बनाने के आदेश दिया था। 2009 के सरकारी आदेश को 2018 में बदला गया और गिलगित-बाल्टिस्तान की विधानसभा के अधिकारों को बढ़ाया गया।

Source NBT

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