Kashmir: सेना कमांडर ने कहा- कश्मीर समस्या नहीं, कश्मीर में समस्या है!

Terrorism In Kashmir: पिछले तीन दशकों में पहली बार सक्रिय आतंकवादी (Terrorism) की संख्या 200 से नीचे गई है और आज यह 130-140 है. लेफ्टिनेंट जनरल डी पी पांडे आउटगोइंग जीओसी 15वीं कोर ने बताया. श्रीनगर में स्थित सेना की 15वीं कोर के निवर्तमान जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे (DP Pandey) ने गुरुवार को कहा कि वह कश्मीर में हिंसा के चक्र को तोड़ने की फिलॉसफी के साथ 15 कोर के प्रमुख के रूप में आए थे और वह काफी हद तक इसमें सफल भी रहे. 

कश्मीर मुद्दे पर बोले कमांडर

श्रीनगर के बादामी बाग में सेना के 15 कोर मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए जीओसी पांडे ने कहा कि कश्मीर समस्या एक समस्या है यह कहना गलत है. बल्कि सच यह है कि कश्मीर (Kashmir) में एक समस्या थी जिसे हम लोग ने समाज के हर वर्ग के साथ मिलकर काफी हद तक दूर कर पाए हैं. हालांकि कुछ लोग शांतिपूर्ण माहौल से खुश नहीं होंगे और वे इसे बाधित करने के लिए नए-नए तरीके आजमाते रहेंगे, लेकिन ऐसे तत्वों को हराने के लिए हमेशा संयुक्त काउंटर उपाय होंगे. बता दें कि लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे जल्द ही मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आर्मी वॉर कॉलेज के कमांडेंट का पदभार संभालेंगे. 

लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे की उपलब्धियां

उनकी उपलब्धियों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में जीओसी ने कहा कि आज मैं कह सकता हूं कि हम सफल हुए. हमने इस मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया है. लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि उन्होंने वही करना जारी रखा जो उनके पूर्ववर्ती करते थे और उन्होंने कुछ भी अनोखा या नया नहीं किया. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनका उत्तराधिकारी उनसे अधिक सक्षम होगा. आंतरिक क्षेत्र में राष्ट्रीय राइफल्स (Rashtriya Rifles) हो या एलओसी (LOC) पर सैनिक, दोनों कश्मीरी समाज के लिए काम करते आए हैं. दोनों ने एक साथ चुनौतियों का सामना किया और सफल हुए. 

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जीओसी ने क्या कहा?

जीओसी ने कहा कि एक तरफ वे लाइव मुठभेड़ों के दौरान आत्मसमर्पण सुनिश्चित करते हुए आतंकवादियों को मारते रहे और दूसरी तरफ युवाओं (Youth) को हथियार उठाने से रोकने के प्रयास में लगे रहे. पिछले एक साल में लगभग 100 युवा जो या तो उग्रवाद में शामिल हो गए थे या शामिल होने वाले थे, उन्हें शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए वापस लाया गया. सचमुच यही मेरी उपलब्धि है. जम्मू-कश्मीर पुलिस को तकनीकी खुफिया जानकारी (टेक्निकल इंफो) से अधिक ह्यूमन इंफो मिलती है और ओवर ग्राउंड वर्कर्स सहित आतंकवादियों (Terrorists) को समाज द्वारा खुद अलग-थलग किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘मेरा प्रयास था कि कोई मां, बहन या बेटी सिर्फ किसी के हथियार उठाने और मुठभेड़ों में मारे जाने के लिए दर्द में न रोए.’ 

हाइब्रिड आतंकवाद एक चुनौती थी

जीओसी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि नौ महीने पहले हाइब्रिड आतंकवाद (Hybrid Terrorism) एक चुनौती थी, लेकिन अब नहीं. उन्होंने कहा, ‘आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त एक सरकारी कर्मचारी, एक दुकानदार या 15 या 16 वर्ष की आयु के छात्र की पहचान करना मुश्किल था. लेकिन अब समाज इतना जीवंत है और ऐसे लोगों की पहचान पल भर में की जा रही है. माता-पिता भी बच्चों पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि वे गलत रास्ते पर न चलें.’ युद्धविराम समझौते (Ceasefire Agreement) और इसके लाभों पर उन्होंने कहा कि यह सेना के लिए कभी चुनौती नहीं थी, लेकिन एलओसी के दोनों ओर के लोगों को परेशानी होती थी. उन्होंने कहा कि आज सीमा के दोनों ओर के लोग शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं जो एक अच्छा संकेत है.

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सुरक्षा को लेकर चुनौतियां

गौरतलब है कि इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को लेकर आतंकी थ्रेट और सुरक्षा को लेकर चुनौतियों से संबंधित एक सवाल के जवाब में जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की धमकी हमेशा रही हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था (Security System) और किए गए उपाय हमेशा ऐसी योजनाओं को विफल कर देंगे. 

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