चीन में कोरोना : शंघाई में संक्रमण से सात और मरीजों की मौत, हजारों नए मामले सामने आए

सार

चीन के 44 शहरों में पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। देश में करोड़ों लोग घरों में कैद हैं। लोगों तक खाने-पीने का सामान भी नहीं पहुंच पा रहा है। सरकारी अधिकारी लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। शंघाई में लोगों को घर छोड़ने से मना किया गया है। सोशल मीडिया में लोग घरों की खिड़कियों से चीखते देखे जा सकते हैं।

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चीन की आर्थिक राजधानी और करीब दो करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले शंघाई शहर में कोरोना के चलते सात और मरीजों की मौत दर्ज की गई है। कोरोना इस नई लहर में शंघाई में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां सख्त लॉकडाउन के बावजूद कोरोना का ओमिक्रॉन स्वरूप कहर ढा रहा है। अन्य रोगों से भी ग्रस्त तीनों मृतकों की उम्र 89 साल से 91 वर्ष दर्ज हुई।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों मृतकों ने टीके की एक भी खुराक नहीं ली थी। शंघाई में पिछले एक दिन में 22 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। बीते 24 घंटे में कोरोना के 2,417 पुष्ट मामले मिले हैं जबकि 19,831 मामले लक्षणहीन हैं। इससे पहले शनिवार को कोरोना के 3,238 केस मिले थे।

हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीन में एक मार्च से अब तक कोविड-19 के 3.72 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें पिछले दिन अकेले शंघाई में ही 2,417 नए मामले सामने आए हैं। शंघाई सरकार ने शहर में उत्पादन इकाईयां फिर से शुरू करने के लिए औद्योगिक उद्यमों के लिए कोविड-19 संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए। यहां तीन बार व्यापक स्तर पर लोगों की जांच भी हो चुकी है।

क्वारंटीन केंद्रों में बिगड़ रहे हालात
सामुदायिक स्तर पर क्वारंटीन (पृथकवास) केंद्रों में रह रहे लोग यहां भयावह हालात का सामना कर रहे हैं। बेबेई (30) नामक एक महिला समेत कई लोगों ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें एक ऊंची छत वाले केंद्र में रखा गया है जहां चारपाइयों की कतारें हैं और हजारों अजनबी एक ही छत के नीचे सोते हैं। यहां लाइटें 24 घंटे जली रहती हैं और नहाने के लिए गर्म पानी तक नहीं मिल पाता है। इस केंद्र में न तो सफाई है और न मूलभूत सुविधाएं हैं।

44 शहरों में पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन
निवेश बैंक नोमुरा और सीएनएन ने बताया कि चीन के 44 शहरों में पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। देश में करोड़ों लोग घरों में कैद हैं। लोगों तक खाने-पीने का सामान भी नहीं पहुंच पा रहा है। सरकारी अधिकारी लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। शंघाई में लोगों को घर छोड़ने से मना किया गया है। सोशल मीडिया में लोग घरों की खिड़कियों से चीखते देखे जा सकते हैं।

चीनी अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च में कमजोर 4.8 फीसदी की दर से बढ़ी
चीन की आर्थिक वृद्धि दर 2022 की पहली तिमाही में 4.8 प्रतिशत की कमजोर दर से बढ़ी है। कोरोना के चलते शंघाई सहित प्रमुख औद्योगिक शहरों में लॉकडाउन के चलते वृद्धि के आंकड़ों में कमजोरी देखी गई। चीन की सरकार ने चालू वर्ष के दौरान 5.5 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य तय किया है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के आंकड़ों के मुताबिक देश के सकल घरेलू उत्पाद में जनवरी से मार्च के दौरान सालाना आधार पर 4.8 फीसदी की वृद्धि हुई, जो इससे पिछली तिमाही में चार फीसदी थी। प्रवक्ता फू लिंगहुई ने मानते हैं कि चीन ने लगातार सुधार के साथ स्थिर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में कुछ दबाव देखने को मिल रहा है और प्रमुख संकेतकों में धीमी वृद्धि देखी गई है।

विस्तार

चीन की आर्थिक राजधानी और करीब दो करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले शंघाई शहर में कोरोना के चलते सात और मरीजों की मौत दर्ज की गई है। कोरोना इस नई लहर में शंघाई में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां सख्त लॉकडाउन के बावजूद कोरोना का ओमिक्रॉन स्वरूप कहर ढा रहा है। अन्य रोगों से भी ग्रस्त तीनों मृतकों की उम्र 89 साल से 91 वर्ष दर्ज हुई।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों मृतकों ने टीके की एक भी खुराक नहीं ली थी। शंघाई में पिछले एक दिन में 22 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। बीते 24 घंटे में कोरोना के 2,417 पुष्ट मामले मिले हैं जबकि 19,831 मामले लक्षणहीन हैं। इससे पहले शनिवार को कोरोना के 3,238 केस मिले थे।

हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीन में एक मार्च से अब तक कोविड-19 के 3.72 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें पिछले दिन अकेले शंघाई में ही 2,417 नए मामले सामने आए हैं। शंघाई सरकार ने शहर में उत्पादन इकाईयां फिर से शुरू करने के लिए औद्योगिक उद्यमों के लिए कोविड-19 संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए। यहां तीन बार व्यापक स्तर पर लोगों की जांच भी हो चुकी है।

क्वारंटीन केंद्रों में बिगड़ रहे हालात

सामुदायिक स्तर पर क्वारंटीन (पृथकवास) केंद्रों में रह रहे लोग यहां भयावह हालात का सामना कर रहे हैं। बेबेई (30) नामक एक महिला समेत कई लोगों ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें एक ऊंची छत वाले केंद्र में रखा गया है जहां चारपाइयों की कतारें हैं और हजारों अजनबी एक ही छत के नीचे सोते हैं। यहां लाइटें 24 घंटे जली रहती हैं और नहाने के लिए गर्म पानी तक नहीं मिल पाता है। इस केंद्र में न तो सफाई है और न मूलभूत सुविधाएं हैं।

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