Bihar Corona Death Scam : बिहार सरकार ने क्यों छिपाई 3951 लोगों की मौत? 24 घंटे में कोरोना से मृतकों का आंकड़ा 5458 से पहुंचा 9429


हाइलाइट्स:

  • बिहार में कोरोना से मृतकों के आंकड़ों में हेराफेरी
  • एक दिन में ही बढ़ गए 3 हजार 951 कोरोना मृतक
  • गलत करनेवालों पर कार्रवाई होगी- प्रत्यय अमृत

पटना
बिहार में ‘कोरोना कांड’ हुआ है। इसकी आशंका काफी दिनों से लोग जता रहे थे। बहुत पहले से कहा जा रहा था कि मृतकों के आंकड़ों में घालमेल है। अब सरकार के रिकॉर्ड से ही इस पर से पर्दा उठ गया। 24 घंटों में कोरोना से मृतकों का आंकड़ा 5 हजार 458 से सीधे 9 हजार 429 पर पहुंच गया।

कोरोना से मौत के आंकड़ों में सरकारी खेल
कोरोना की दूसरी लहर में मौत के आंकड़ों को छिपाने का सरकारी खेल सामने आने लगा है। राज्य में तकरीबन 4 हजार लोगों की मौत का आंकडा छिपा लिया गया था। सरकार ने अब तक कोरोना से 5 हजार 458 मौत होने की जानकारी दी थी। 24 घंटे में ये आंकड़ा 9 हजार 429 पर पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग ने ये बात स्वीकार की है। ट्वीट के जरिए जानकारी भी दी है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि श्मशान से लेकर कब्रिस्तानों तक का आंकड़ा जोड़ लिया जाए तो ये तादाद कई गुना ज्यादा होगी।

‘जिलों से भेजा गया मृतकों का गलत आंकड़ा’
बिहार सरकार हर दिन कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा जारी कर रही थी। सरकार के पास जिलों से रिपोर्ट भेजे जा रहे थे, उन्हें जोड़ कर मौत का पूरा आंकड़ा जारी किया जा रहा था। अब सरकारी जांच में पता चला कि जिलों से मृतकों की जो संख्या भेजी जा रही थी, उसमें बड़े पैमाने पर हेरा-फेरी की गई। जिलों ने मृतकों की सही संख्या भेजी ही नहीं। लिहाजा गलत आकंड़े जारी किए गए।

‘गलत आंकड़ा देनेवालों पर कार्रवाई होगी’
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने माना कि कोरोना से होने वाली मौत का सही आंकड़ा सामने नहीं आया था। मीडिया से बातचीत में प्रत्यय अमृत ने स्वीकार किया कि जब अपने स्तर से जांच कराई तो ये बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने गडबड़ी की और सही संख्या की जानकारी नहीं दी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकार को गलत जानकारी क्यों दी गई?
दरअसल 18 मई को ही राज्य सरकार ने कोरोना से होने वाली मौत को लेकर जांच कराने का आदेश जारी किया था। इसके लिए जिलों में दो तरह की टीम बनाई गई। एक टीम में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ-साथ कॉलेज के मेडिसिन विभाग के हेड को रखा गया। वहीं दूसरी टीम सिविल सर्जन के नेतृत्व में बनाई गई जिसमें एक और मेडिकल ऑफिसर शामिल थे। दोनों स्तर पर जब जांच की गई तो पता चला कि मौत के आकड़ों को छिपाया गया। सरकार को गलत जानकारी दी गई।



Source NBT

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