नेशनल अवॉर्ड विजेता वमन भोंसले का निधन: नहीं रहे ‘राम लखन’ और ‘सौदागर’ जैसी फिल्मों के एडिटर, सुभाष घई ने दी श्रद्धांजलि


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

19 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्म एडिटर वमन भोंसले का निधन हो गया है। 89 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। फिल्ममेकर सुभाष घई ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर दी है। घई ने लिखा है, “वमन भोंसले सर की आत्मा को शांति मिले। मेरी पहली फिल्म ‘कालीचरण’ में जीनियस एडिटर, जो बाद में ‘खलनायक’ तक मेरी सभी फिल्मों के एडिटर टीचर रहे और मुझे अपनी ‘ताल’ जैसी फिल्मों की एडिटिंग के लिए प्रेरित करते रहे। एक महान टीचर।”

1978 में मिला था नेशनल अवॉर्ड
वमन भोंसले को 1978 में विनोद खन्ना और विद्या सिन्हा स्टारर फिल्म ‘इनकार’ के लिए बेस्ट एडिटिंग का नेशनल अवॉर्ड मिला था, जिसके डायरेक्टर राज एन सिप्पी थे। 1992 में रिलीज हुई दिलीप कुमार, राजकुमार, मनीषा कोइराला और विवेक मुश्रान स्टारर और सुभाष घई के निर्देशन में बनी ‘सौदागर’ के लिए वमन ने फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था।

गोवा से मुंबई आए थे भोंसले
भोंसले का जन्म गोवा में हुआ था। वहां अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी कर 1952 में वे मुंबई आ गए थे। यहां उन्होंने एडिटर डी एन पाई की निगरानी में बॉम्बे टॉकीज में एडिटिंग की ट्रेनिंग ली और फिर 12 साल तक फिल्मिस्तान स्टूडियो में बतौर असिस्टेंट एडिटर काम किया।

1967 में पहला बड़ा प्रोजेक्ट मिला
1967 में आई राज खोसला निर्देशित ‘दो रास्ते’ बतौर एडिटर वमन का पहला बड़ा प्रोजेक्ट था, जिसकी खूब सराहना हुई। बाद में वमन ने खोसला के अलावा गुलजार, सुभाष घई, शेखर कपूर, रवि टंडन, महेश भट्ट, राज सिप्पी, अनिल गांगुली, सुनील दत्त, विक्रम भट्ट और के विश्वनाथ जैसे कई डायरेक्टर्स के साथ काम किया। उनके द्वारा एडिट की गईं ब्लॉकबस्टर फिल्मों में ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘दो रास्ते’, ‘इनकार’, ‘दोस्ताना’, ‘गुलाम’, ‘अग्निपथ’, ‘हीरो’, ‘कालीचरण’, ‘राम लखन’ और ‘सौदागर’ शामिल हैं।

खबरें और भी हैं…



Source link

अपनी राय दें