किलर मिसाइलों से लैस हुआ रूसी हवाई योद्धा, 300 किमी तक हवा में खाक होंगे दुश्‍मन

किलर मिसाइलों से लैस हुआ रूसी हवाई योद्धा, 300 किमी तक हवा में खाक होंगे दुश्‍मन


अमेरिका और नाटों देशों से टक्‍कर के लिए रूस ने कमर कस ली है। रूस ने अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमानों से टक्‍कर के लिए बनाए गए अपने सबसे घातक और अत्‍याधुनिक फाइटर जेट सुखोई-57 को किलर मिसाइलों से लैस करना शुरू कर दिया है। ये मिसाइलें हवा में दुश्‍मन के विमानों को 300 किमी दूर से ही खत्‍म करने में सक्षम हैं। पांचवीं पीढ़ी का यह लड़ाकू विमान अपने पंखों के नीचे लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली कई नई मिसाइलों को समेट रहा है जिससे यह दुनिया के सबसे घातक विमानों में शुमार हो जाएगा। रूस के इस फाइटर जेट पर न केवल भारत बल्कि दुनिया के कई देशों की नजर है।

अमेरिका से टक्‍कर लेगी रूस की नई R-77 मिसाइल

-r-77-

रूस के अख्‍तूबिन्‍स्‍क फ्लाइट टेस्‍ट सेंटर में उड़ान के दौरान बनाए नए वीडियो में सुखोई-57 की नई मिसाइलें नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिसाइलों के आने से रूस लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता काफी बढ़ गई है। नाटो ने रूस के इस नए फाइटर जेट को ‘फेलोन’ नाम दिया है। रूस ने अब इन विमानों को हवा से हवा में मार करने वाली Vympel R-77 मिसाइलों से लैस करना शुरू किया है। यह पुरानी R-77 मिसाइल का नया संस्‍करण है। यह मिसाइल अब अमेरिका की ऐमराम मिसाइलों के बराबर शक्तिशाली हो गई है। नई R-77 मिसाइल की मारक क्षमता अब 110 किमी है। भारत भी अपने सुखोई विमानों के लिए इन्‍हीं मिसाइलों का इस्‍तेमाल कर रहा है।

रूस के K-77M से बच नई पाएंगे दुश्‍मन के जेट

-k-77m-

रूस सुखोई-57 जेट को K-77M मिसाइलों से लैस कर रहा है जो चौथी पीढ़ी के विमानों में लगाए जाने वाले AESA रेडॉर को ढूढ़कर उसका काम तमाम करने में माहिर है। इस मिसाइल को ऐसे बनाया गया है कि दुश्‍मन जेट के पायलट कोई भी कलाबाजी करके बच नहीं सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिसाइल की मारक क्षमता हवा से हवा में 100 मील या 160 किमी है। माना जा रहा है कि यह मिसाइल सुखोई-57 का मुख्‍य हथियार बनेगी। इसके अलावा रूस R-77 मिसाइल का ही एक और उन्‍नत संस्‍करण विकसित कर रहा है जिसे रैमजेट इंजन से लैस किया जाएगा।

रूसी मिसाइल 300 किमी तक खाक करेगी दुश्‍मन

-300-

रूस ने सुखोई-57 के लिए खासतौर पर 300 किमी तक मार करने में सक्षम एक हाइपरसोनिक मिसाइल बनाया है। इस मिसाइल के जरिए सुखोई-57 अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण ठिकानों को तबाह कर सकेगा। इस मिसाइल का नाम R-37M है जो अमेरिका के किसी भी हवा से हवा में मार करने वाली वाली मिसाइल से ज्‍यादा ताकतवर है। यह मिसाइल 1985 से ही सेवा में है लेकिन इसका उन्‍नत संस्‍करण 300 किमी तक मार करने में सक्षम है। वहीं रूसी मीडिया में दावा किया गया है कि इस मिसाइल की मारक क्षमता 400 किमी तक है। इसे अवॉक्‍स किलर मिसाइल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी गति मैक 6 की है।

युद्धग्रस्‍त सीरिया में अपने करतब दिखा चुका Su-57

-su-57

वर्ष 2018 में रूस ने युद्ध प्रभावित सीरिया में Su-57E विमान के सभी हथियारों और बचाव प्रणालियों का परीक्षण किया था। बताया जा रहा है कि सीरिया में सफल रहने के बाद इसे रूसी एयरफोर्स में शामिल करने की अनुमति दी गई है। Su-57E को रूसी कंपनी सुखोई ने बनाया है। पांचवीं पीढ़ी का यह स्‍टील्‍थ विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में माहिर है। इस विमान को किसी भी मौसम में चाहे दिन हो या रात, इस्‍तेमाल किया जा सकता है। दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को ध्‍वस्‍त कर सकता है। यह ड्रोन विमानों के साथ भी काम कर सकता है।

Su-57 पर भारत की भी करीबी नजर

su-57-

29 जनवरी, 2010 को Su-57E ने पहली बार उड़ान भरी थी। अभी कुल 10 विमान उड़ान भर रहे हैं। रूस के इस अत्‍याधुनिक विमान पर जहां भारत ने भी नजदीकी से नजर बना रखी है, वहीं मास्‍को भी चाहता है कि लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रहा भारत उसका यह विमान खरीदे। हालांकि भारत ने अभी तक अपने पत्‍ते नहीं खोले हैं। वर्ष 2007 में भारत और रूस संयुक्‍त रूप से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने के लिए सहमत हुए थे। हालांकि बाद में भारत इस प्रोग्राम से अलग हो गया था। बताया जाता है कि भारत इस विमान के इंजन और रेडार की पकड़ में न आने की क्षमता से खुश नहीं था।



Source NBT

अपनी राय दें