कोविड-19: संक्रमण रोकने में कारगर हो सकती है नई मर्स वैक्सीन, चूहे पर परीक्षण में मिली सफलता

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नई मर्स वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने एक चूहे पर इस वैक्सीन का सफल परीक्षण किया, जिसे मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) की हैवी डोज दी गई थी। मर्स कोरोना वायरस कोविड-19 से काफी मिलता जुलता है, जिसने इस समय पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ताओं ने दावा किया यह वैक्सीन कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए एक हानिकारक वायरस का इस्तेमाल करता है। इसके परीक्षण के बाद कोविड-19 समेत अन्य कोरोना वायरस बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने उम्मीद जगती है।

जर्नल एमबायो में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह वैक्सीन एक पैराइंफ्लूएंजा वायरस (पीआई5) है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन होता है, जो मर्स कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए इस्तेमाल करता है। मर्स की घातक डोज देने के बावजूद जब चूहे पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया तो उसे कुछ नहीं हुआ।

यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ता प्रोफेसर पॉल मैक्क्रे ने कहा, हमारा नया अध्ययन दर्शाता है कि पैराइंफ्लूएंजा वायरस को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उपयोगी वैक्सीन साबित हो सकती है। शोधकर्ता अब जानवरों पर पैराइंफ्लूएंजा वायरस आधारित वैक्सीन के ज्यादा इस्तेमाल कर अध्ययन की योजना बना रहे हैं क्योंकि मर्स और कोविड-19 दोनों ही कोरोना वायरस के कारण फैला है।

मर्स ज्यादा घातक है, लेकिन 2012 से यह वायरस फैलने के बाद से अब तक केवल 2,494 मामले सामने आए हैं। वहीं, वुहान में पिछले साल दिसंबर में फैले कोविड-19 वायरस से दुनियाभर में अब तक 70 हजार लोग मारे जा चुके हैं।

नई मर्स वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने एक चूहे पर इस वैक्सीन का सफल परीक्षण किया, जिसे मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) की हैवी डोज दी गई थी। मर्स कोरोना वायरस कोविड-19 से काफी मिलता जुलता है, जिसने इस समय पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ताओं ने दावा किया यह वैक्सीन कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए एक हानिकारक वायरस का इस्तेमाल करता है। इसके परीक्षण के बाद कोविड-19 समेत अन्य कोरोना वायरस बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने उम्मीद जगती है।

जर्नल एमबायो में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह वैक्सीन एक पैराइंफ्लूएंजा वायरस (पीआई5) है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन होता है, जो मर्स कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए इस्तेमाल करता है। मर्स की घातक डोज देने के बावजूद जब चूहे पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया तो उसे कुछ नहीं हुआ।

यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ता प्रोफेसर पॉल मैक्क्रे ने कहा, हमारा नया अध्ययन दर्शाता है कि पैराइंफ्लूएंजा वायरस को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उपयोगी वैक्सीन साबित हो सकती है। शोधकर्ता अब जानवरों पर पैराइंफ्लूएंजा वायरस आधारित वैक्सीन के ज्यादा इस्तेमाल कर अध्ययन की योजना बना रहे हैं क्योंकि मर्स और कोविड-19 दोनों ही कोरोना वायरस के कारण फैला है।

मर्स ज्यादा घातक है, लेकिन 2012 से यह वायरस फैलने के बाद से अब तक केवल 2,494 मामले सामने आए हैं। वहीं, वुहान में पिछले साल दिसंबर में फैले कोविड-19 वायरस से दुनियाभर में अब तक 70 हजार लोग मारे जा चुके हैं।



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