शास्त्रीनगर में 7 साल व 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाला शांतिदूत दरिंदा गिरफ्तार।


जयपुर:शास्त्रीनगर में 7 साल और 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दरिंदे को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर लक्ष्मण गाैड़ ने बताया कि अाराेपी सिकंदर ने 2001 में पहली बार चाेरी की वारदात की थी। उस मामले में वह गिरफ्तार हाे चुका था। इसके बाद दाे नकबजनी की वारदात की थीं। इन मामलाें में भी गिरफ्तार हाे चुका था। वर्ष 2004 में मुरलीपुरा में बच्चे काे अगवा करके उसके साथ कुकर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था अाैर जेल भेज दिया था। काेर्ट ने इस प्रकरण में सिकंदर काे अाजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2015 में जेल से जमानत पर बाहर अाने के बाद भट्टा बस्ती इलाके में दाे बच्चियाें के साथ छेड़छाड़ कर दी। तब लाेगाें ने सिकंदर काे पकड़ लिया था। जब पुलिस माैके पर अाई ताे अाराेपी पुलिसकर्मियाें पर सरिये से जानलेवा हमला कर भाग गया था। अाराेपी के खिलाफ अब तक कुल 12 अापराधिक मुकदमे दर्ज हाे चुके हैं। अाराेपी ने काेर्ट पेशी के दाैरान हिरासत से भागने का प्रयास भी किया था।

डायरी में िलखा-िसकंदर उर्फ मौत का कहर

शहर का शैतान सिकंदर

15 साल पहले भी बच्चे की हत्या में उम्रकैद हुई, जमानत पर बाहर था…

यूं पकड़ा गया जीवाणु…पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

सीपी अानंद श्रीवास्तव ने बताया-दरिंदे के घर में मिली काॅपी में लिखा था, सिकन्दर उर्फ माैत का कहर। अाराेपी काे पकड़ने के लिए कमिश्नरेट के 400 पुलिसकर्मी जुटे थे। अब मामले की जांच डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी केस अाॅफिसर स्कीम के तहत करेंगे। जल्द चार्जशीट देंगे।

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जयपुर। काेतवाली थाना के हैड कांस्टेबल सुरेन्द्र सिंह ने अधिकारियों पर भेदभाव का आरोप लगाया। भास्कर को देर रात हैड कांस्टेबल ने बताया कि 3 जुलाई को सुबह 11 बजे शास्त्रीनगर थाना में एडिशनल कमिश्नर लक्ष्मण गौड़ और एडिशनल डीसीपी नॉर्थ धर्मेंद्र सागर ने हमारी 14 लाेगों की टीम की मीटिंग ली थी। जिसमें मैंने बताया था-विजय नगर भट्टा बस्ती में जीवाणु उर्फ सिकंदर नाम का एक आराेपित रहता है। इसके पिता बाबू खान को मैं 20-22 साल से जानता हूं। जीवाणु 14-15 साल का था। तब से उसे जानता हूं। उसने मुरलीपुरा में एक 11 साल के बच्चे के साथ गलत काम किया और उसकी हत्या कर पानी के टैंक में डाल दिया था। यह जानकारी बताने के बाद दोनों अधिकारियों ने मुझे कहा कि हमें इसकी फोटो चाहिए। दिनेश हैड कांस्टेबल अाैर बद्री प्रसाद काे मेरे साथ लगा दिया। 3 जुलाई शाम काे मैं अाैर दिनेश एक बाइक पर विजय नगर कच्ची बस्ती में गए। वहां मैंने उसके अाैर उसके दाेस्ताें काे पता किया ताे सामने अाया कि काेटा में उसका एक दाेस्त रहता है। मेरे फाेन में धर्मेंद्र सागर के नंबर नहीं थे। मंैने दिनेश काे कहा कि तुम्हारे पास धर्मेंद्र सागर के नंबर है क्या। उसने सागर साहब काे फाेन लगाकर जानकारी दी।साहब काे लगा यह काम दिनेश ने किया है।

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