“रोहिंग्या मुसलमान” आतंकवाद का दूसरा नाम है : रणवीर सत्यम

वर्मा (म्यांमार) :रोहिंग्या मुसलमान आखिर कौन हैं? आखिर क्यों इसे म्यांमार से खदेड़ा गया? क्यों किसी अन्य मुस्लिम देश ने इन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने से इनकार कर दिया?

कौन है रोहिंग्या मुसलमान?

सबसे पहले तो आपको ये बता दूँ की जिस तरह हिन्दुओं में जातिवाद है ठीक उसी तरह मुसलमानों में भी जातिवाद है, मुसलमानों में कुल 350 से भी अधिक जाति हैं, लेकिन भारत में कुल 308 जाति के मुसलमान रहते हैं। सबसे बड़ी बात ये की ये सभी मुसलमान कनवर्टेड हैं, खुद मोहम्मद पैगम्बर भी पैदाइशी मुसलमान नहीं था। इस्लाम के अच्छे जानकार इस बात को भली भांति जानते है, परन्तु कट्टरपंथी मुसलमान इसे मानने को तैयार नहीं। खतना, हलाला, कुर्बानी जैसे रिबाजों की शुरुआत पैगम्बर मोहम्मद ने ही किया।

अब बात आती है की ये रोहिंग्या मुसलमान कौन है और इनका अस्तित्व कहाँ है, दरअसल रोहिंग्या मुसलमान भी इन्ही जातियों में से एक जाति है जो मुसलमानों में सबसे पिछड़ी और सबसे निचली जाति के तौर पर जानी जाति है। जो मुख्य रूप से बांग्लादेश, म्यांमार में पायी जाति है। 1400 ई. के आस-पास बर्मा (आज के म्यांमार) के ऐतिहासिक अराकान प्रांत (आज के रखाइन राज्य) में आकर बस गए थे। इनमें से बहुत से लोग 1430 में अराकान पर शासन करने वाले बौद्ध राजा नारामीखला (बर्मी में मिन सा मुन) के राज दरबार में नौकर थे। इस राजा ने मुस्लिम सलाहकारों और दरबारियों को अपनी राजधानी में प्रश्रय दिया था। पूरी दुनिया में करीब 22 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं, जिनमे वर्ष 2016-2017 के पहले 17 लाख रोहिंग्या अकेले वर्मा में पाए जाते थे। बांकी रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश, श्रीलंका, और भारत में रहते हैं।

आखिर क्यों म्यांमार से इन रोहिंग्या मुसलमानों को खदेड़ दिया गया?

जैसा की आपसभी जानते हैं की मुसलमान जबतक अल्पसंख्यक होते हैं तब ये शांत रहते हैं लेकिन जैसे ही किसी क्षेत्र में इनकी संख्या बढती है वैसे वैसे ये धीरे धीरे उस क्षेत्र में गैर मुसलमानों से दुर्व्यवहार करना शुरू कर देते हैं, और ठीक यही दुर्व्यवहार उन्होंने ने वर्मा में भी शुरू कर दिया, वर्मा में मूलरूप से बौद्ध समुदाय रहते हैं जो बहुसंख्यक हैं। बौद्ध समुदाय दुनिया में सबसे सहनशील और शांतिप्रिय समुदाय है लेकिन एक सीमा तक, जैसा की आपको पहले बताया की रखाइन राज्य के बौद्ध राजा नारामीखला ने इन मुसलमानों को अपने राज्य में शरण दिया परन्तु समय के साथ इनकी संख्या बढती गयी और मुस्लिम आक्रान्ताओं ने बौद्ध समुदाय के लोगों पर जुल्म करना शुरू कर दिया, कई प्रतिमाओं को तोड़ दिया गया और जो नहीं टुटा उसे नुक्सान पहुंचा दिया गया, इन रोहिंग्या मुसलमानों ने उसके बाद बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय के महिलाओं का बलात्कार करना शुरू कर दिया ताकि बौद्ध भिक्षु और हिन्दू उस क्षेत्र को छोड़ कर चले जाएँ, इससे कई बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय के लोग धीरे धीरे उस मुस्लिम बहुल क्षेत्र से चले गये, लेकिन जो बौद्ध और हिन्दू नही गये इन रोहिंग्या मुसलमानों ने उन बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय की महिलाओं और बच्चियों का बलात्कार करते और निर्ममता पूर्वक तरीके से उसकी हत्या कर फेंक देते थे। धीरे-धीरे इनका जुल्म और बढ़ता गया और फिर इन रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय के लोगों का नरसहांर करना शुरू कर दिया, लाखों लाख की संख्या में बौद्ध और हिन्दू समुदाय के लोगों की हत्या कर उसे दफना देते और उनके जमीन खेतों पर कब्जा करने लगे। बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय की महिलाओं और छोटी बच्चियों का बलात्कार आम बात हो गयी, पहले ये झुडं बनाकर किसी बौद्ध और हिन्दू समुदाय के इलाके को टारगेट करते और अचानक झुण्ड बनाकर उनपर हमला कर देते और फिर हजारो लाखों की संख्या में उन निहत्थे बौद्ध और हिन्दुओं की हत्या कर उन्हें दफना देते थे।
एक और मुख्य वजह
इनसब के अलावा एक और मुख्य वजह थी कुर्बानी जैसा की आपसभी जानते हैं की गौ हिन्दू और बौद्ध समुदाय के आस्था से जुड़ा है, इसलिए म्यांमार सरकार ने पहले भी गौ हत्या पर रोक लगा दी थी तथा इन रोहिंग्या मुसलमानों को कुर्बानी के नाम पर बकड़े की कुर्बानी देने को कहा। कुर्बानी के नाम पर ये जाहिल समुदाय बेजुबान जानवरों का कत्लेआम करते थे, म्यांमार सरकार के रोक के बाबजूद ये मुर्ख और जाहिल समुदाय के रोहिंग्या मुसलमान गौ हत्या करने से बाज नहीं आये, और कुर्बानी के नाम पर बेजुबान जानवरों का कत्लेआम कर मर्द बने फिरते थे, बौद्ध समुदाय और हिन्दू समुदाय के बहन बेटियों का बलात्कार कर मर्द बने फिरते थे।

इसके बाद म्यांमार सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लिया और इन जाहिल गंवार रोहिंग्या मुसलमानों की नागरिकता समाप्त कर दिया और देश से खदेड़ने का फैसला कर लिया। इसके बाद फिर भड़का बौद्ध भिक्षुओं क्रोध जिसने लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को जला कर राख कर दिया। वर्ष 2016-17 के बाद एक गुप्त ऑपरेशन के जरिये इन रोहिंग्या मुसलमानों का सफाया करना शुरू कर दिया, उसके बाद सेना और बौद्ध सगठनों द्वारा लाखों लाख की संख्या में इन रोहिंग्या मुसलमानों का कत्लेआम कर दिया गया और बांकी बचे हुए रोहिंग्या मुसलमान दहशत से म्यांमार से पलायन करने लग गये।

अब बात आती है की आखिर क्यों किसी अन्य मुस्लिम देश ने इन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने से इनकार कर दिया?

जैसा की आपको पहले बताया ये रोहिंग्या मुसलमान बहुत ही पिछड़ी जाति के थे जनसंख्या नियंत्रण कानून न होने के कारण रोहिंग्या मुसलमान एक से अधिक निकाह करते और बच्चे पैदा करते हैं, जिससे रोजगार की कमी थी जिस वजह से ये सभी अपराधी प्रवृति के थे, मार-काट, चोरी, लुट, मुख्य रूप से यही उनका पेशा बन गया। चंद पैसों के लिए ये किसी की हत्या करने से भी पीछे नहीं हटते थे, कई आतंकी संगठन और ISIS, ISI जैसी कट्टरपंथी आतंकी संगठन इन रोहिंग्या मुसलमानों को थोड़े पैसे देकर कोई भी काम करवाते हैं, आज भी इन संगठनो में इन रोहिंग्या मुसलमानों को आताम्घाती और आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसलिए सभी मुस्लिम देशों ने इन रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में घुसने नहीं दिया और साथ ही ये कहा की अगर कोई उसके सीमा के आसपास भी दिखा तो उसे खत्म कर दिया जायेगा।

भारत में रोहिंग्या मुसलमानो की घुसपैठ
म्यांमार से खदेड़े जाने के बाद बचे खुचे रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के जरिये भारत में घुसपैठ कर रहे हैं, और ये आज भी जारी है, बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल और फिर यहाँ से भारत के अन्य राज्यों जैसे बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली या यूँ कहें की अब लगभग भारत के सभी राज्यों में फैलते जा रहें है, और इस घुसपैठ में मुसलमानों द्वारा संचालित मदरसे और कुछ NGO भी शामिल है, जो 5000 से 10,000 लेकर इनको घुसपैठ करवाने में मदद करते हैं। इन NGO और मदरसों के सक्रीय सदस्य बॉर्डर के पास रह रहे गरीब किसानो को थोड़े पैसे की लालच देकर उनसे घुसपैठ करवाते हैं। एक बार बॉर्डर पार करने के बाद ये NGO और मदरसे अपने नेटवर्क के जरिये भारत के अन्य राज्यों में इन्हें भेज देते हैं। इसके बाद रोजगार के नाम पर अपने मन मुताबिक काम करवाते हैं, फिर आतंकी संगठन इन्ही NGO और मदरसों के जरिये इन रोहिंग्या मुसलमानों को आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

रोहिंग्या मुसलमान आतंकवाद का दूसरा नाम : रणवीर सत्यम

रूद्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सत्यम ने कहा की रोहिंग्या मुसलमान आतंकवाद का दूसरा नाम है। और सरकार को इसपर गंभीरता से सोंचने की आवश्यकता है और इसके साथ सख्त कदम उठाना आवश्यक है। ISI इन NGO और मदरसों को भारत में रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ करवाने के लिए फण्ड मुहैया कराता ताकि वो भारत में आतंकवाद और गृह युद्ध जैसे हालात पैदा कर सके और इसे मजहब के नाम पर राजनीतिक रूप देकर सरकार पर दवाब बना सके, देश में दंगे भड़का सके। देश में रोहिंग्या मुसलमानों का घुसपैठ ISI की एक सोंची समझी साजिश है।

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