सुप्रीम कोर्ट का तुगलकी फरमान फिल्म पद्मावत से बैन हटाया

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पद्मावत से बैन हटा कर 25 जनवरी को रिलीज़ करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए ये कहा की अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है, भंसाली ने फिल्म का नाम पद्मावती से पद्मावत कर दिया साथ ही CBFC निर्देश पर कुछ सीन को हटा दिया। जिसके बाद CBFC ने फिल्म को UA सर्टिफिकेट जारी कर दिया। फ़िल्मकार पक्ष के वकील हरीश साल्वी ने यह दलील दी की फिल्म से विवादस्पद सीन हटाने और फिल्म का नाम पद्मावती से पद्मावत किये जाने के बाद ही CBFC ने इसे पास कर दिया है तो इसपर कोई राज्य सरकार कैसे किसी फिल्म पर बैन लगा सकती है।  जिसके बाद बी के मिश्रा की बेंच ने ये कहा की जब बैंडिट क्वीन जैसी फिल्म रिलीज़ हो सकती है तब पद्मावत क्यों नही रिलीज़ हो सकती।

कुछ दलाल पत्रकार और टीवी चैनल ने फिल्म का विरोध करने वालों को गुंडा कह अपने सेकुलरिज्म और फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का हवाला देकर कहा की करनी सेना खुद को कानून से ऊपर समझती है। कुछ दलाल पत्रकारों और दलाल न्यूज़ चैनल भंसाली को बेचारा कहने और फिल्म का महिमामंडन करने में कोई कसर नही छोड़ा। इन दलाल पत्रकारों में जिसने फिल्म का विरोध करने वाली जनता को गुंडा कह कर ये कहा की अब ये गुंडे तय करेंगे की कौन फिल्म रिलीज़ होगी कौन नहीं। अब वक़्त आ गया है की ऐसे पत्रकारों और न्यूज़ चैनलों का भी विरोध हो

फिल्म से अब भी वो विवादस्पद सीन नहीं हटाया गया जिसमें रानी पद्मावती के चरित्र को घुमर डांस करते दिखाया गया है। साथ ही खिलजी जैसे लुटेरे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है। कुल मिलकर सोंचने वाली बात ये है की सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर, तीन तलाक, बलात्कार जैसे संगीन मुद्दों पर सालों साल गुजरने के बाद भी फैसला नही सुना सकी लेकिन दूसरी ओर 10 दिन पहले भंसाली द्वारा दायर किये याचिका पर इतनी जल्दी कैसे फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट शायद ये भूल गयी की सबसे बड़ी अदालत जनता है और जब जनता ही इसका विरोध कर रही है तो फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ हिन्दुओं की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचती रही है। ये फिल्म ही एक अकेला मुद्दा नहीं है, ऐसे कई मुद्दे हैं जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाने का काम करती आई है।जली कट्टु, सोमनाथ मंदिर में जल चढ़ाने से लेकर अन्य बहुत मामलों में हमेशा हिन्दुओं को टारगेट करती आ रही है। वहीँ दूसरी ओर ट्रिपल तलाक जैसे मामले में सुप्रीम कोर्ट के तथाकथित जज मामले को धार्मिक आस्था का हवाला देकर मामले में हस्तक्षेप करने से अपना पलड़ा झाड़ लेती है।

सुप्रीम कोर्ट ये तय नहीं करेगी की हिन्दू पूजा करे न करे जल चढ़ाये न चढ़ाये। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला देश में तनाव पैदा करने का काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद कई राज्यों में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गया है लेकिन ये तो अभी शुरुआत है आनेवाले वक़्त में यह एक बहुत बड़े दंगे का रूप धारण कर सकती है। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की होगी।

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